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Showing posts from January, 2018
इसकी सिर्फ 1 चम्मच बुढ़ापे में 20 साल की जवानी भर दे, क्योंकि ये पूरे शरीर का कायाकल्प करती है आज हम आपको ऐसी औषध के बारे में बताएँगे जो शरीर के अँगो को पुनः नया जीवन दे सकती है, जो कैन्सर के मरीज़ों के लिए आयुर्वेद जगत की संजीवनी है जिसका नाम पुनर्नवा है। पुर्ननवा संस्कृत के दो शब्द पुनः अर्थात ‘फिर’ और नव अर्थात ‘नया’ से बना है। पुर्ननवा औषधि में भी अपने नाम के अनुरूप ही शरीर को पुनः नया कर देने वाले गुण पाए जाता है। इसलिए इसे रोगों से लड़ने से लेकर कैंसर के इलाज तक में उपयोग किया जाता है। इसकी 1 चम्मच भोजन के साथ अर्थात सब्जी में मिलाकर सेवन करने से बुढापा नही आता अर्थात बूढ़ा व्यक्ति भी जवाँ बना रहता है क्योंकि इससे शरीर के सभी अंग का पुनः नयी कोशिका का निर्माण होता रहता है। “शरीर पुनर्नवं करोति इति पुनर्नवा” जो अपने रक्तवर्धक एवं रसायन गुणों द्वारा सम्पूर्ण शरीर को अभिनव स्वरूप प्रदान करे, वह है ‘पुनर्नवा’। यह हिन्दी में साटी, साँठ, गदहपुरना, विषखपरा, गुजराती में साटोड़ी, मराठी में घेटुली तथा अंग्रेजी में ‘हॉगवीड’ नाम से जानी जाती है। मूँग या चने की दाल मिलाकर इसकी बढ़िया सब्ज...
जो महिला ये करेगी उसको कभी जोड़ो में दर्द, कमर में दर्द, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर की समस्या भी नहीं होगी अमेरिका में गेहूं न होने की वजह से आटा पिसने से लेकर पावरोटी (डबलरोटी) बनने तक 90 दिन निकल जाते हैं. हमारे आयुर्वेदिक शास्त्र में वागभट्ट जी कहते हैं कि आटे को जितनी जल्दी इस्तेमाल किया उतना ही बेहतरीन है और रोटी को बनने के बाद 48 मिनट तक खा लेना चाहिए और पिसा हुवा गेंहू का आटा 15 दिन से अधिक नही खाना चाहिए और बाजरा, मक्के का आटा तो 7 दिन तक खा लेना चाहिए. इसका कारण यह है कि उसकी माइक्रोन्यूट्रीयंट्स समय के साथ साथ कम होते चले जाते हैं अब प्रश्न यह उठता है की ताजा आता कहा से लायें तो उसके लिए हाथ वाली चक्की हैं. हिंदुस्तान में हजारों वर्षों से घर में चक्की पर आटा बनाने की परम्परा रही है. इस चक्की पर रिसर्च किया गया है कि ये क्या अद्भुत चीज बनाई है. जो हमारे ऋषि मुनियों ने यह दुनिया की ऐसी अद्भुत मशीन है, जो ताजा आटा तो देती ही है, साथ में हमें स्वास्थ्य भी प्रदान करती है. चक्की चलाने से हमारी अंदर की सारी मासपेशियाँ फ्लेक्सिबल रहती हैं. हमारे देश में ये जो महिलाएं घर में चक्की च...
जानिए दूध और दही के साथ कौन कौन सी चीजें आपको लेनी चाहिए और कौन सी नहीं वागभट्ट जी कहते हैं की कोई भी दो जीचें ऐसी न खाएं जिनका जिन का गुण और स्वाभाव एक दुसरे के विपरीत हो, दो विरुद्ध वस्तुएं एक साथ कभी भी न खाएं ऐसी 103 वस्तुओं का उल्लेख वाग्भट जी ने अपनी पुस्तक में किया है जो एक दुसरे की एकदम खिलाफ है इनमे से कुछ वस्तुएं नीचे बताई गयी हैं प्याज और दूध सबसे पहली ऐसी दो वस्तुएं हैं जो एक दुसरे की जानी दुश्मन है अगर दूध और प्याज एक दुसरे के साथ खाया तो 20 बीमारियाँ आयेंगी सबसे ज्यादा त्वचा की बीमारियाँ आयेंगी आपको सोराइसिस, एक्सिमा, खाज-खुजली जैसी बीमारियाँ होगीदूसरा दूध और कटहल(जैक फ्रूट) एक साथ न खाएं दोनों एक दुसरे के जानी दुश्मन हैं और दूध और कोई भी ऐसा पदार्थ जो सिट्रिक एसिड प्रधान हो एक साथ कभी न खाएं संतरा मौसमी नारंगी अंगूर आदि फल सिट्रिक एसिड से भरपूर हैं एक खट्टी चीज जो आपने बनाई और एक जो भगवन ने बनाई हो उसे दूध के साथ कभी नं खाएं यानी कोई भी खट्टा फल दूध के साथ न खाए,वागभट्ट जी ने बहुत सालों तक रिसर्च के बाद बताया एक ही खट्टा फल है जो दूध के साथ खाया जा सकता है और ...
भोजन करते समय इस नियम का पालन करे ताकि खाना सही से पचे वागभट्ट जी कहते हैं की सबसे बड़ा दुःख होता है दैहिक दुःख यानि शरीर का दुःख और दूसरा है वैदिक दुःख यानि भगवन द्वारा दिया गया दुःख और तीसरा है भौतिक दुःख, भोतिक दुःख हमारे देश के लोगों के लिए जानना इतना जरुरी नही है हमें सिर्फ दैहिक दुखों के बारे में ज्ञान होना ही अनिवार्य है शरीर के दुःख दूर कैसे करें – वागभट्ट जी कहते हैं यदि आपको शरीर के दुःख दूर करने हैं तो आपका पेट स्वस्थ होना चाहिए ये जो शरीर का मध्य भाग यानि पेट है यंही से अन्य रोग उत्पन्न होते है यदि पेट की शरीर के अन्य भागों के साथ तुलना करें तो 90% रोग पेट के हैं 10% रोग ही पेट के बाहर से होते हैं यानि घुटनों से एडी से जांघ हृदय या मष्तिष्क आदि से हो सकता है वागभट्ट जी कहते हैं कि पेट आपके जीवन का महत्वपूर्ण अंग है तो इसका बहुत ध्यान रखें जो आपको दुखों से बचाता है तो पेट का अगर ध्यान रखना है तो उन्होंने इसके लिए कुछ सूत्र लिखें जिनको हम अपने जीवन में पालन करें तो जीवन भर कोई दुःख नही होगा यदि हम पेट से जुडी बिमारियों को गिने तो इनकी संख्या 148 है. यदि हम इन सूत्रों का...
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एलर्जी का रोग पुरे विश्व में तेज़ी से फैल रहा है, जानिये इसके लक्षण और सरल घरेलू उपचार ज्यादातर देखा गया है कि, जब कोई नाक, त्वचा, फेफड़ों एवं पेट का रोग पुराना हो जाता है. और उसका इलाज नहीं होता तो अकसर लोग उसे एलर्जी कह देते हैं. बहुत सारे ऐसे रोगी जीवा में उपचार के लिए आते हैं और यह बताते हैं कि उन्हें एलर्जी है, लेकिन क्या है यह एलर्जी इसका ज्ञान हमें अकसर नहीं होता. यदि रोग के बारे में ज्ञान नहीं है तो उसका उपचार कैसे होगा. पूरे विश्व में यह रोग तेजी से फैल रहा है. आजकल युवा अवस्था एवं बाल्यावस्था में भी एलर्जी रोग देखने में आता है. एलर्जी प्रतिक्रिया करने वाले तत्वों को एलरजेन कहा जाता है. ये एलरजेन या एलर्जी पैदा करने वाले तत्व वास्तव में कोई हानिकारक कीटाणु या विषाणु नहीं बल्कि अहानिकर तत्व होते हैं. इसके लिए हम कई बार अंग्रेजी दवाओं का सेवन करते है, लेकिन अंग्रेजी दवायें एलर्जी के लक्षणों को कम करती है पर एलर्जी का इलाज जड़ से नहीं करती पर सही तरीके से घरेलू और आयुर्वेदिक नुस्खे अपनाकर एलर्जी को जड़ से खत्म तक किया जा सकता है. अगर आप स्किन, गले, नाक या कोई और एलर्जी से परे...
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खून में कचरा (Acidity) की वजह से आता है हार्ट अटैक, अर्जुन की छाल से ऐसे करे कण्ट्रोल बागभट्ट जी सुबह दूध पीने को मना करते हैं लेकिन जो सुबह हम चाय पीट हैं उसमें भी दूध का यूज होता है बाग़भट्ट जी के किसी भी सूत्र और शास्त्र में चाय का उलेख नही हिया क्योंकि बाग़भट्ट जी 3500 वर्ष पगले हुए और चाय 250 साल पहले अंग्रेजों के द्वारा लाइ गयी हाँ लेकिन उन्होंने काढ़े का जीक्र किया है वो कहते है जो काढ़ा हमारे वात पित्त और कफ को कम करे ऐसा कोई भी कड़ा सुबह दूध में मिलाकर पिया जा सकता है जैसे कि अर्जुन की छाल का काढ़ा वात को सबसे ज्यादा कम करता है यह रक्त की एसिडिटी को कम करता है जो की शरीर की एसिडिटी से भी ज्यादा खतरनाक होती है और हार्ट अटैक का कारण बनती है अर्जुन की छाल सबसे तेजी से रक्त की एसिडिटी को ख़त्म करता है इसलिए अर्जुन की छाल का काढ़ा पीयें नवम्बर दिसम्बर जनवरी और फ़रवरी में वात सबसे ज्यादा होता है ठण्ड के दिनों में वायु का प्रकोप सबसे ज्यादा होता है और इस समय में अर्जुन की छाल का काढ़ा गर्म दूध में मिलकर पीयें तो औषधि का काम करेगा. याद रहे की यह काढे की तासीर हमेशा गर्म होती है इसलिए...